New Update: मार्च के महीने में जब गर्मी धीरे-धीरे अपना असर दिखाने लगती है ठीक उसी समय एक नया और शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ देश के मौसम में बड़ा बदलाव लाने वाला है। 14 और 15 मार्च को उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश के बाद अब एक और नया मौसमी तंत्र 17 मार्च से सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से 18 से 20 मार्च के बीच देश के बड़े हिस्से में तेज आंधी, गरज-चमक और भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। मौसम विभाग ने इस बदलाव को लेकर विशेष चेतावनी जारी की है।
पश्चिमी विक्षोभ क्या है और इस बार क्यों है यह खतरनाक
पश्चिमी विक्षोभ एक मौसमी तंत्र है जो भूमध्य सागर की दिशा से आता है और भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में प्रवेश करता है। यह पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश का कारण बनता है। इस बार का विक्षोभ अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय और व्यापक बताया जा रहा है जिसकी वजह से इसका असर केवल उत्तर भारत तक सीमित न रहकर मध्य, पश्चिम, पूर्व और दक्षिण भारत तक फैल सकता है।
17 मार्च से शुरू होकर यह विक्षोभ 18, 19 और 20 मार्च तक अपना पूरा असर दिखाएगा। इसके साथ बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी भी इस मौसमी बदलाव को और तेज बनाएगी। मौसम विभाग का कहना है कि इस दौरान कई राज्यों में तेज हवाएं, बिजली कड़कना और भारी बारिश की संभावना है इसलिए नागरिकों और किसानों दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है।
उत्तर भारत और पहाड़ी राज्यों में क्या होगा
उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में इस विक्षोभ का असर सबसे पहले दिखाई देगा। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में 17 मार्च से ही नई बर्फबारी शुरू होने की संभावना है। यह बर्फबारी उन क्षेत्रों में भी हो सकती है जहाँ पिछले कुछ हफ्तों से शुष्क मौसम था। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
19 मार्च को इस विक्षोभ का असर मैदानी इलाकों तक पहुँचेगा। दिल्ली-NCR, पंजाब और हरियाणा में तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। राजस्थान के अलवर, भरतपुर और दौसा जैसे जिलों में भी गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान है। उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी बादल छाने और बारिश होने की संभावना है।
मध्य और पश्चिम भारत पर मौसम का असर
मध्य भारत में 18 और 19 मार्च को मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों ग्वालियर, गुना, भोपाल और इंदौर में बारिश होने की संभावना है। यह बारिश उस क्षेत्र के लोगों को गर्मी से कुछ राहत जरूर देगी लेकिन खेती के लिहाज से यह चुनौतीपूर्ण समय होगा।
पश्चिम भारत में गुजरात के अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत में 19 मार्च को हल्की बारिश की उम्मीद जताई जा रही है। इन इलाकों में काफी समय से सूखा मौसम था इसलिए यह बारिश कुछ राहत लेकर आएगी। महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र में भी आंधी और बारिश की गतिविधियाँ तेज होने का अनुमान है। इन इलाकों में हवा की गति भी काफी अधिक रह सकती है।
पूर्वी और दक्षिण भारत में भी बारिश का दौर
देश के पूर्वोत्तर राज्यों में बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में इन दिनों अच्छी बारिश होने की संभावना है। इन राज्यों के निचले इलाकों में जलभराव का खतरा भी बना रह सकता है इसलिए वहाँ के निवासियों को सतर्क रहने की जरूरत है।
दक्षिण भारत में 19 और 20 मार्च को बारिश का दायरा विस्तृत होगा। तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश और केरल में इन दिनों बारिश की अच्छी संभावना है। इन राज्यों में प्री-मानसून गतिविधियाँ सक्रिय होने से आगामी मानसून के आगमन के संकेत मिल सकते हैं। कुल मिलाकर देश के लगभग हर हिस्से में इस विक्षोभ का कुछ न कुछ असर जरूर दिखेगा।
किसानों के लिए विशेष सावधानी और सुझाव
इस मौसम बदलाव की सबसे बड़ी चिंता खेतों में खड़ी रबी फसलों को लेकर है। मार्च का महीना गेहूं और सरसों की कटाई का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इसी दौरान तेज हवाएं और बारिश खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुँचा सकती हैं। गेहूं की बालियाँ तेज हवाओं से गिर सकती हैं और दाने खराब हो सकते हैं।
कुछ इलाकों में ओलावृष्टि यानी Hailstorm की भी आशंका है जो फसलों के लिए और भी हानिकारक हो सकती है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अगले कुछ दिनों में कटाई और मड़ाई का काम मौसम की स्थिति देखकर ही करें। जो फसल पहले से कट चुकी है उसे खुले मैदान में न छोड़ें बल्कि किसी सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखें। किसान अपने जिले के कृषि विभाग से संपर्क में रहें और फसल बीमा योजना की जानकारी रखें।
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक और जनजागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। मौसम पूर्वानुमान में परिवर्तन संभव है और वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है। हम भारतीय मौसम विभाग से आधिकारिक रूप से संबद्ध नहीं हैं। सटीक जानकारी के लिए mausam.imd.gov.in या Damini App देखें और किसान नुकसान की स्थिति में जिला कृषि विभाग से संपर्क करें।









