Gold Silver Prices: भारतीय सर्राफा बाजार में इन दिनों एक ऐसी हलचल देखने को मिल रही है जिसने आभूषण प्रेमियों से लेकर निवेशकों तक सभी को एक साथ खुश कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मची उथल-पुथल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बदलते समीकरणों के कारण भारत में सोने और चाँदी की कीमतों में एकाएक बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत में करीब नौ हजार से नौ हजार दो सौ रुपये तक की कमी आई है जो इस धातु की कीमतों के हालिया इतिहास में एक बड़ा बदलाव है। यह खबर उन लाखों लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो लंबे समय से सोना या चाँदी खरीदने की योजना बना रहे थे लेकिन ऊँची कीमतों के कारण खरीदारी टाल रहे थे।
आज के ताजा भाव
बाजार की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत लगभग 1,45,000 रुपये प्रति दस ग्राम के आसपास चल रही है जो पिछले स्तरों की तुलना में करीब 9,200 रुपये कम है। 22 कैरेट का जेवराती सोना जो आभूषणों के लिए सबसे अधिक उपयोग किया जाता है, अभी 1,43,300 रुपये प्रति दस ग्राम के करीब उपलब्ध है। 18 कैरेट सोने का दाम करीब 1,19,000 रुपये प्रति दस ग्राम के आसपास है। चाँदी में भी दो हजार से चार हजार रुपये प्रति किलोग्राम की कमी आई है और अब यह लगभग 2,29,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बिक रही है। हालाँकि यह ध्यान रखें कि अलग-अलग शहरों और स्थानीय ज्वेलर्स के यहाँ कीमतों में थोड़ा-बहुत अंतर हो सकता है।
गिरावट की असली वजह
सोने और चाँदी की कीमतों में आई इस जोरदार गिरावट के पीछे कोई एक कारण नहीं बल्कि कई वैश्विक घटनाएं और नीतिगत परिवर्तन एक साथ काम कर रहे हैं जिन्हें समझना आवश्यक है। मध्य-पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बनाया है जिसका सीधा असर कीमती धातुओं के कारोबार पर पड़ रहा है। इसके साथ ही कतर से होने वाली एलएनजी आपूर्ति में सत्रह प्रतिशत की कमी आई है और विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसे सामान्य होने में पाँच साल तक का समय लग सकता है जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी दबाव बन रहा है।
डॉलर और ब्याज दरों का प्रभाव
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती न करने के संकेतों ने सोने पर सीधा दबाव बनाया है। यह समझना जरूरी है कि जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में कारोबार करता है महंगा हो जाता है और इससे उसकी माँग घट जाती है। ब्याज दरें ऊँची रहने से निवेशक सोने के बजाय बॉन्ड और फिक्स्ड रिटर्न वाले विकल्पों की ओर अधिक आकर्षित होते हैं क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता। इसी कारण बड़े निवेशकों ने अपना पैसा सोने से निकालकर अन्य परिसंपत्तियों में लगाना शुरू किया जिससे कीमतें नीचे आईं।
कच्चे तेल का असर और वैश्विक अर्थव्यवस्था
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का प्रभाव भी सोने-चाँदी की कीमतों पर अप्रत्यक्ष रूप से पड़ रहा है। जब ऊर्जा महंगी होती है तो वैश्विक उत्पादन और परिवहन की लागत बढ़ जाती है जिसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर होता है। इस स्थिति में निवेशक अपनी जोखिम रणनीति बदलते हैं और कुछ मामलों में सोने से पैसा निकालकर अन्य क्षेत्रों में लगाते हैं। हालाँकि यह भी उतना ही सच है कि जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है तो सोने को एक सुरक्षित आश्रय माना जाता है और इसकी माँग फिर से बढ़ सकती है। इसीलिए विशेषज्ञ इस गिरावट को एक अस्थायी बदलाव मान रहे हैं।
अल्पकालीन और दीर्घकालीन दृष्टिकोण
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक दृष्टि से फिलहाल कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है और संभव है कि थोड़ी और गिरावट आए या अचानक कोई बड़ी तेजी भी दिख जाए। लेकिन दीर्घकालिक नजरिये से देखें तो जब तक अंतरराष्ट्रीय तनाव, वैश्विक महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है तब तक सोने की कीमतों में एक बार फिर बड़ी उछाल आने की प्रबल संभावना है। इतिहास गवाह है कि संकट के समय सोना हमेशा मजबूत होता है और गिरावट के समय खरीदारी करने वाले निवेशकों को आमतौर पर अच्छा रिटर्न मिलता है।
खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान
यदि आप इस गिरावट का लाभ उठाकर सोना या चाँदी खरीदने का विचार कर रहे हैं तो कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखना जरूरी है। सबसे पहले हमेशा बीआईएस हॉलमार्क वाला ही सोना खरीदें जो शुद्धता की सरकारी गारंटी है। गहने पर दिए गए हॉलमार्क यूनिक आईडी की जाँच अवश्य करें ताकि आप सही शुद्धता का उत्पाद ही खरीदें। यह भी ध्यान रखें कि सोने के मूल दाम के अलावा तीन प्रतिशत जीएसटी और मेकिंग चार्ज अतिरिक्त देने होते हैं इसलिए कुल लागत की गणना करके ही बजट बनाएं। एक बार में बड़ी रकम लगाने की बजाय धीरे-धीरे खरीदारी करने की रणनीति अधिक सुरक्षित होती है।
अक्षय तृतीया से पहले आई गिरावट
अक्षय तृतीया और विवाह के मौसम से ठीक पहले आई यह गिरावट उन परिवारों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जो इन अवसरों के लिए सोने की खरीदारी की योजना बना रहे थे। इस समय सोना खरीदने से न केवल उन्हें कम दाम का लाभ मिलेगा बल्कि त्योहारी माँग बढ़ने पर कीमतें और ऊपर जाने से पहले ही उनकी जरूरत पूरी हो जाएगी। बाजार की यह अनुकूल स्थिति हमेशा नहीं रहती इसलिए जो लोग जरूरत और बजट के हिसाब से खरीदारी कर सकते हैं उन्हें इस अवसर का सदुपयोग करना चाहिए।
सोने और चाँदी की कीमतों में आई यह बड़ी गिरावट एक साथ कई वैश्विक कारणों का परिणाम है और बाजार में इस तरह के मौके बहुत कम आते हैं। जो निवेशक और खरीदार लंबे समय से इंतजार में थे उनके लिए यह समय सोच-समझकर खरीदारी करने का है। हालाँकि बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में बड़ा निर्णय लेना भी ठीक नहीं। सही शुद्धता, सही डीलर और सही बजट के साथ की गई खरीदारी ही दीर्घकालीन रूप से फायदेमंद होती है।
Disclaimer
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें उल्लिखित सोने-चाँदी की कीमतें अनुमानित और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित हैं। वास्तविक दाम आपके शहर, ज्वेलर और समय के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। किसी भी निवेश से पहले बाजार की ताजा जानकारी और किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार की सलाह अवश्य लें। लेखक या प्रकाशक इस लेख के आधार पर किए गए किसी भी निवेश निर्णय के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।









